तुलसी ममता राम सों, समता सब संसार!राग न रोष न रोग दुःख, दास भए भाव पार!!

"तुलसी ममता राम सों, समता सब संसार!राग न रोष न रोग दुःख, दास भए भाव पार!!" जो ब्रम्हज्ञानी हैं जिनके हर पल मे वाणी, कर्म और गुण मैं राम (ब्रम्ह)…

गीध देह तजि धरि हरि रुपा, भूषन बहु पट पीत अनूपा! स्याम गात बिसाल भुज चारी, अस्तुति करत नयन भरि बारि!

"गीध देह तजि धरि हरि रुपा, भूषन बहु पट पीत अनूपा! स्याम गात बिसाल भुज चारी, अस्तुति करत नयन भरि बारि!!" गीधराज जटायू जब परहित कार्य मे (सीता जी) को…

श्री राम चरित मानस–“-यथा नाम तथा गुणः

श्री राम चरित मानस--"-यथा नाम तथा गुणः" यह ऐसा प्रभु चरित है जिसके सानिध्य मे उन्मत्त हाथी रूपी मन जो अंकुश विहीन हो जाता है और उसके पास सब कुछ…

ब्यापकु एकु ब्रम्ह अबिनासी, सत चेतन धन आनंद रासी!

"ब्यापकु एकु ब्रम्ह अबिनासी, सत चेतन धन आनंद रासी!" इस सृष्टि में जिसका जो भी अस्तित्व है वह प्रभु (नियंता) की कृपादृष्टि से है! वह ही सचिदानन्द ,चेतन,ब्रम्ह, निराकार, साकार,…

अवधपुरी सैम प्रिय नहि सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ!

"अवधपुरी सैम प्रिय नहि सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ!" अवधपुरी (अयोध्या) के समान प्रिय इस पृथ्वी पर कोई और स्थान नही यह कुछ ही लोग जानते है क्योंकि यह…

बंदउँ संत असज्जन चरना,दुखप्रद उभय बीच कछु बरना!

"बंदउँ संत असज्जन चरना,दुखप्रद उभय बीच कछु बरना!" इस संसार का निर्माण गुण और दोष से मिलकर बना हुआ है लेकिन गुण हमेशा पूज्य है उसी प्रकार संत(सज्जन) लोग पके…

हरि हर बिमुख धर्म रति नाहिं, ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं!

"हरि हर बिमुख धर्म रति नाहिं, ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं!" आदिकाल से अब तक प्रभु से बिमुख होकर किसी का भी कल्याण नहीं हुआ ,रावण ने भी बिमुख…

हरन कठिन कलि कलुष कलेसू, महामोह निसि दलन दिनेसू!

"हरन कठिन कलि कलुष कलेसू, महामोह निसि दलन दिनेसू!" इस सृष्टि के आदिकाल से कलिकाल तक मे जीव अभी सबसे अधिक असंतुष्ट और दुखी है उसका कारण अभीप्स लिप्सा ,कार्य…

जाकी रही भावना जैसी,प्रभु मूरति देखी तिन्ह तैसी!

"जाकी रही भावना जैसी,प्रभु मूरति देखी तिन्ह तैसी!" व्यक्ति अपनी भावना के अनुरूप जैसा चाहे बन सकता है और जो चाहे पा सकता है! भावना अंतःकरण की तरंग है जिससे…

धीरज धरम मित्र अरु नारी,आपद काल परखिये चारी

"धीरज धरम मित्र अरु नारी,आपद काल परखिये चारी!" जैसे श्रद्धा, विश्वास, सदाचार,समर्पण चारों एकत्र होकर मनुष्य को मुक्ति द्वार तक ले जाते हैं, उसी प्रकार धीरज(धैर्य), धरम (विवेक द्वारा उचित,…